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इनकम टैक्स स्लैब रेट्स (दरें) और डिडक्शन्स (कटौतियाँ) –एफवाय 2019-20, एवाय 2020-21

ये हैं इनकम टैक्स स्लैब्स के लिए आपकी गाईड

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टैक्स प्लानिंग आपको स्मार्ट तरीके से सेविंग्ज़ इंस्ट्रूमेंट्स (बचत के साधनों में) इन्वेस्ट करने में मदद करती है, और इस तरह आपको इन्वेस्टमेंट वृद्धि के साथ साथ सरकार को भुगतान किए जाने वाले टैक्स राशि में कमी का मिश्रित लाभ (कम्बाइन्ड बेनिफिट) पेश करती है। .

फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) 2019-20 की समाप्ति के करीब आने के साथ, आप व्यक्तियों के बीच उनके फायनेंस प्लानिंग (आर्थिक नियोजन) और टैक्स कैल्कुलेटर्स के इस्तेमाल के ज़रिए इनकम टैक्स स्लैब्स जानने की जल्दबाजी देख सकते हैं। लोग अक्सर एक छोटी गलती करते हैं और वह यह कि वे एक फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) के लिए टैक्स लाएबिलिटी (देयता) कम करने के तरीके तलाशते हैं आर्थिक वर्ष के आखिर में। सही समय पर प्लानिंग करना और आपका टैक्स ब्रैकेट जाँच लेना आवश्यक है क्योंकि इससे आपको आपकी सेविंग्ज़ (बचत) में और भी ज़्यादा पैसे जोड़ने में मदद हो सकती है। ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर्स का इस्तेमाल करते हुए प्रभावी प्लानिंग के साथ इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार आप देय राशि में कमी ला सकते हैं। महत्वपूर्ण निर्णयों को अंतिम क्षणों तक के लिए छोड़ देने से आपकी इनकम हाईर (उच्च) टैक्स ब्रैकेट में आ सकती है।

2019-20 के लिए इनकम टैक्स स्लैब के बारे में बातचीत जारी रखने से पहले, आईए टैक्स प्लानिंग से जुड़ी कुछ मूलभूत बातों से शुरुआत करते हैं।  

आर्थिक वर्ष 2019-20 के लिए नवीनतम इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स (दरें)  


भारत में करदाताओं (टैक्स पेयर्स) के लिए 2019-20 के लिए संक्षिप्त में  इनकम टैक्स ब्रैकेट्स इस प्रकार है:

1. 2.5 लाख रुपए से कम इनकम (आय) वाले टैक्स ब्रैकेट में आनेवाले व्यक्तियों के लिए ज़ीरो टैक्स लाएबिलिटी यानि शून्य देय टैक्स  

2. 2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक की इनकम (आय) वाले टैक्स ब्रैकेट में आनेवाले व्यक्तियों के लिए उनके विशिष्ट आयुवर्ग के आधार पर 5% तक का टैक्स   

3. 5 लाख से 10 लाख रुपए तक की इनकम (आय) वाले टैक्स ब्रैकेट में आनेवालों के लिए 20% टैक्स 

4. 10 लाख रुपए से ज़्यादा की इनकम (आय) वाले व्यक्तियों के लिए 30% टैक्स

यदि आपको टैक्स कैल्कुलेटर्स के इस्तेमाल के बारे में पता है तो आपकी टैक्स लाएबिलिटी (कर देयता) के बारे में समझना मुश्किल काम नहीं है। आपकी इनकम टैक्स लाएबिलिटी (कर देयता) की जाँच करने के लिए आप किसी प्रोफेशनल (पेशेवर) से मदद भी ले सकते हैं।

हिस्सा दर हिस्सा 2019-20 के लिए नए इनकम टैक्स स्लैब्स के बारे में आईए गहराई से जानते हैं  –

पार्ट 1:

60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स

इनकम टैक्स स्लैब

टैक्स रेट्स (दरें)

 ₹2,50,000 तक

शून्य

₹2,50,001 से ₹5,00,000 तक के टैक्स ब्रैकेट में

₹2,50,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 5%

₹5,00,001 से ₹10,00,000 तक के टैक्स ब्रैकेट में

₹12,500 + ₹5,00,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 20%

 ₹10,00,000 से ज़्यादा

₹1,12,500 + ₹10,00,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 30% 


इसे भी पढ़े: एफवाय 2020-21 के लिए इनकम टैक्स स्लैब  

पार्ट 2:

इनकम टैक्स स्लैब

टैक्स रेट्स (दरें)

 ₹3,00,000 तक

शून्य

₹3,00,000 से ₹5,00,000 तक के टैक्स ब्रैकेट में

5%

 ₹5,00,001 से ₹10,00,000 तक के टैक्स ब्रैकेट में

₹10,000 + ₹5,00,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 20%

₹10,00,000 से ज़्यादा

₹1,10,000 + ₹10,00,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 30%


पार्ट 3:

80 वर्ष या उससे ज़्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटिज़न्स के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स:

इनकम टैक्स स्लैब

टैक्स रेट्स (दरें)

 ₹5,00,000 तक

शून्य

 ₹5,00,001 से ₹10,00,000 तक के टैक्स ब्रैकेट में

20%

₹10,00,000 से ज़्यादा

₹1,00,000 + ₹10,00,000 से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) का 30%


ऊपर दिए गए टैक्स स्लैब्स के बारे में कुछ अन्य पॉईंट्स जिसे आपको जानना चाहिए:

1. ऊपर बताए गए इनकम टैक्स स्लैब्स की दरों में सरचार्ज और सेस (अधिभार और उपकर) शामिल नहीं है। टैक्स कैल्कुलेटर्स का इस्तेमाल करते हुए टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) कैल्कुलेट करते समय दोनों को अतिरिक्त रुप से विचार में लिया जाता है।

क. यदि इनकम (आय) 50 लाख से 1 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट में है तो सरचार्ज 20% होगा

ख. 1 करोड से 2 करोड तक के टैक्स ब्रैकेट में आनेवाली इनकम (आय) के लिए सरचार्ज 15% होगा

ग.  यदि इनकम (आय) 2 करोड रुपए से 5 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट में आती है तो 25% सरचार्ज लागू होगा ।

 

Income


ऊपर दिए गए टैक्स स्लैब्स के बारे में कुछ अन्य पॉईंट्स जिसे आपको जानना चाहिए:

1. ऊपर बताए गए इनकम टैक्स स्लैब्स की दरों में सरचार्ज और सेस (अधिभार और उपकर) शामिल नहीं है। टैक्स कैल्कुलेटर्स का इस्तेमाल करते हुए टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) कैल्कुलेट करते समय दोनों को अतिरिक्त रुप से विचार में लिया जाता है।

क. यदि इनकम (आय) 50 लाख से 1 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट में है तो सरचार्ज 20% होगा

ख. 1 करोड से 2 करोड तक के टैक्स ब्रैकेट में आनेवाली इनकम (आय) के लिए सरचार्ज 15% होगा

ग.  यदि इनकम (आय) 2 करोड रुपए से 5 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट में आती है तो 25% सरचार्ज लागू होगा ।

Income

. यदि नेट इनकम (निवल आय) 5 करोड रुपए से ज़्यादा है तो 37% सरचार्ज लागू होगा

ङ . इनकम टैक्स और सरचार्ज पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस लागू होगा

2. पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स (दरें) एक समान है

3. यदि आपकी इनकम (आय) 5 लाख रुपए तक के टैक्स ब्रैकेट में आती है, तो आप इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 87ए के अंतर्गत संपूर्ण छूट के लिए एलिजिबल (पात्र) होते हैं।

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See how the latest budget impacts your tax calculation. Updated as per latest budget on 1 February, 2020. No deductions will be allowed under the new tax regime.

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एफवाय 2019-20 के लिए घरेलू कंपनी के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स:

टर्नओवर/कारोबार  विवरण

इनकम टैक्स स्लैब्स

 400 करोड रुपए तक के टर्नओवर के लिए

25%

400 करोड रुपए से ज़्यादा के टर्नओवर के लिए

30%

यदि कंपनी ने सेक्शन 115बीए का उपयोग किया हो

25%

यदि कंपनी ने सेक्शन 115बीएए का उपयोग किया हो

22%

यदि कंपनी ने सेक्शन 115बीएबी का उपयोग किया हो

15%

किसी भी अन्य घरेलू कंपनी के लिए

30%


सूत्र  के अनुसार, घरेलू कंपनियों के लिए 2019-20 के लिए नए इनकम टैक्स ब्रैकेट  के  कुछ अन्य सुसंगत (रेलिवेंट) तथ्य इस प्रकार हैं :

1. यदि कुल इनकम (आय) 10 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट से ज्यादा है तो 12% सरचार्ज (अधिभार) लागू होगा।

2. यदि कुल इनकम (आय) 1 करोड से 10 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट के बीच है तो 7% सरचार्ज (अधिभार) लागू होगा।

3. सेक्शन 115बीएए या 115बीएबी का विकल्प चुननेवाली कंपनी के लिए सरचार्ज 10% होगा चाहे इनकम (आय) जो भी हो ।

4. टैक्स के साथ सरचार्ज पर 4% का हेल्थ और एजुकेशन सेस (स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर) भी लागू होगा

एफवाय 2019-20 के लिए एक विदेशी कंपनी के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स:

टर्नओवर विवरण

इनकम टैक्स स्लैब्स

40%

 

1. यदि नेट इनकम (निवल आय) 1 से 10 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट में आती है तो 2% का अतिरिक्त सरचार्ज लागू होता है।

2. यदि नेट इनकम (निवल आय) 10 करोड़ रुपए से ज़्यादा है तो सरचार्ज बढकर 5% हो जाता है।

3. इनकम टैक्स के 4% के रेट से एक अतिरिक्त हेल्थ और एजुकेशन सेस लागू होता है। 

एफवाय 2019-20 के लिए एक कोऑपरेटिव सोसायटी (सहकारी संस्था) के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स:

टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय)

टैक्स रेट (दर)

 अधिकतम रु. 10,000

10%

रु. 10,000 से रु. 20,000 के टैक्स ब्रैकेट में

20%

  रु. 20,000 से ज़्यादा

30%

1. इनकम टैक्स स्लैब्स में सरचार्ज द्वारा वृद्धि होती है, 1 करोड रुपए से ज़्यादा की कुल इनकम (आय) के मामले में यह टैक्स के 12% के बराबर होता है।

2. इनकम टैक्स का 4% और सरचार्ज भी हेल्थ और एजुकेशन सेस (स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर) के तौर पर जोड़ा जाता है।

एफवाय 2019-20 के लिए एक पार्टनरशिप फर्म(भागीदारी फर्म) के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स:

1. एलएलपी सहित एक पार्टनरशिप फर्म (भागीदारी फर्म) 30% के रेट पर टैक्सेबल (करयोग्य) होती है।

2. यदि नेट इनकम (निवल आय) 1 करोड रुपए के टैक्स ब्रैकेट से ज़्यादा है, तो अतिरिक्त सरचार्ज इनकम टैक्स के 12% के बराबर होता है।

3. हेल्थ और एजुकेशन सेस (स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर) इनकम टैक्स और सरचार्ज के 4% के बराबर होता है।

असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए विभिन्न इनकम टैक्स स्लैब्स बेहतर तरीके से समझने के लिए आईए एक उदाहरण लेते हैं –

सुरेश एक सैलरी पाने वाला व्यक्ति है और एफवाय 2019-20 में वो 5.5 लाख रुपए की कुल इनकम कमाता है। वहीं दूसरी ओर याशी की वार्षिक सैलरी (वेतन) 10 लाख रुपए है। 

टैक्स कैल्कुलेटर के अनुसार, उनके इनकम टैक्स स्लैब्स के आधार पर निम्नलिखित टेबल दोनों की टैक्स लाएबिलिटी (कर देयता) दर्शाता है –

रुपए में

 सुरेश

याशी

एक साल में कुल सैलरी (वेतन)

5,50,000

10,00,000

< p>छूट : स्टैन्डर्ड डिडक्शन

 

50,000

50,000

छूट : सेक्शन 80सी के अंतर्गत

80,000

1,50,000

छूट : एचआऱए डिडक्शन

95,000

95,000

ग्रॉस टैक्सेबल इनकम सकल करयोग्य आय

2,75,000

7,05,000

इनकम टैक्स कैल्कुलेशन

 

 

2.5 लाख रु. तक

0

0

2.5 लाख रु. से 5 लाख रु. तक के टैक्स ब्रैकेट में (5%)

1,250

12,500

5 लाख रु. से 10 लाख रु. तक के टैक्स ब्रैकेट में (20%)

0

41,000

10 लाख रु. से ज़्यादा  30%

0

0

कुल इनकम टैक्स लाएबिलिटी (देयता)

1,250

53,500

सेक्शन 87ए के अंतर्गत टैक्स में छूट *

1,250

0

अतिरिक्त सेस (उपकर) @4%

0

2,140

देय (पेयेबल) इनकम टैक्स

0

55,640

*  कुल इनकम प्रति वर्ष 5 लाख रुपए से कम है, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अनुसार सेक्शन 87ए के अंतर्गत आप संपूर्ण टैक्स छूट के लिए पात्र (एलिजिबल) हैं।

इनकम टैक्स स्लैब्स का क्या मतलब है?

एक व्यक्ति के तौर पर आप मेहनत करते हैं ताकि समय के साथ आपकी इनकम में वृद्धि हो। चाहे आप भारत में क सैलरीपाने वाले व्यक्ति हों (सैलरीड इंडिविजुअल) या एक बिज़नेसमैन   एक विशिष्ट आर्थिक वर्ष (फायनेंशियल ईयर) में कमाई गई कुल इनकम (आय) के आधार पर आपको सरकार को इनकम टैक्स देना होता है। क्योंकि आपके टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स का भुगतान करना आपका कानूनी दायित्व है, आप कैल्कुलेशन के लिए ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं या किसी टैक्स प्रोफेशनल (पेशेवर) की सेवा ले सकते हैं।

What Do Income Tax Slabs Mean?

इनकम टैक्स स्लैब्स का क्या मतलब है?

एक व्यक्ति के तौर पर आप मेहनत करते हैं ताकि समय के साथ आपकी इनकम में वृद्धि हो। चाहे आप भारत में एक सैलरीपाने वाले व्यक्ति हों (सैलरीड इंडिविजुअल) या एक बिज़नेसमैन   एक विशिष्ट आर्थिक वर्ष (फायनेंशियल ईयर) में कमाई गई कुल इनकम (आय) के आधार पर आपको सरकार को इनकम टैक्स देना होता है। क्योंकि आपके टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स का भुगतान करना आपका कानूनी दायित्व है, आप कैल्कुलेशन के लिए ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं या किसी टैक्स प्रोफेशनल (पेशेवर) की सेवा ले सकते हैं।

What Do Income Tax Slabs Mean?

सालाना इनकम के आधार पर, सभी भारतीय नागरिकों को अनेकों कैटेगरीज़ (वर्गों) के साथ जुड़े इनकम टैक्स स्लैब्स या टैक्स ब्रैकेट के एक सिस्टम (प्रणाली) में कैटेगराइज़ (वर्गीकृत) किया जाता है।

आपके द्वारा भरे जानेवाले टैक्स और आपकी वार्षिक इनकम (आय) का सह-संबंध होते हैं इनकम टैक्स स्लैब्स। आमतौर पर इन्हें टैक्स रेट्स या टैक्स ब्रैकेट्स के नाम से जाना जाता है, जो बढ़ती जाती है जैसे जैसे आपकी इनकम में बढ़ोतरी होती है और हाईर इनकम टैक्स स्लैब्स में शामिल हो जाती है।  

इतना ही नहीं, इनकम टैक्स स्लैब्स हर साल बदल सकते हैं। यूनियन बजट 2019 की घोषणा के अनुसार फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) 2019-20 के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स  में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। उम्र के अनुसार, भारतीय करदाता (टैक्स पेयर) तीन कैटेगरीज़ (वर्गों) में विभाजित किए जाते हैं:

1. 60 वर्ष से कम उम्र के निवासी और इसके साथ ही अनिवासी भारतीय

2. 60 वर्ष और 80 वर्ष के बीच के निवासी वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटिज़न)

3. 80 वर्ष की उम्र से ज़्यादा के निवासी सुपर सीनियर सिटिज़न 

एफवाय 2019-20 के लिए इनकम टैक्स की बचत कैसे करें 

एफवाय 2019-20 के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। यह न सिर्फ आपको बताता है कि आपकी सालाना इनकम किस ब्रैकेट में आती है बल्कि आपको विभिन्न टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स (कर बचत निवेश) के लिए भी तैयार करता है। ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर्स की मदद से आप इन विवरणों का इस्तेमाल आपकी टैक्स लाएबिलिटी (देयता) का पता करने के लिए कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स के आधार पर आप आपकी बचत में बढ़ोतरी कर सकते हैं। आप टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स (कर बचत निवेश) के लाभ पा सकते हैं बशर्ते कि आप फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) की शुरुआत से ही इसके लिए प्लानिंग करें। कई टैक्सपेयर्स (करदाता) साल के आखरी महिने तक इसे टालते हैं, जिसके कारण वे टैक्स बचत करने में विफल होते हैं। 

How to Save Tax

एफवाय 2019-20 के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। यह न सिर्फ आपको बताता है कि आपकी सालाना इनकम किस ब्रैकेट में आती है बल्कि आपको विभिन्न टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स (कर बचत निवेश) के लिए भी तैयार करता है। ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर्स की मदद से आप इन विवरणों का इस्तेमाल आपकी टैक्स लाएबिलिटी (देयता) का पता करने के लिए कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए इनकम टैक्स स्लैब्स के आधार पर आप आपकी बचत में बढ़ोतरी कर सकते हैं। आप टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स (कर बचत निवेश) के लाभ पा सकते हैं बशर्ते कि आप फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) की शुरुआत से ही इसके लिए प्लानिंग करें। कई टैक्सपेयर्स (करदाता) साल के आखरी महिने तक इसे टालते हैं, जिसके कारण वे टैक्स बचत करने में विफल होते हैं।How to Save Tax

समय से टैक्स सेविंग इन्स्ट्रूमेंट्स (कर बचत साधनों) में निवेश करना और टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल करने से आपकी कुल वार्षिक इनकम निचले (लोवर) इनकम टैक्स स्लैब्स में आती है। इसके साथ ही आपकी टैक्स सेविंग आपको जीवन में लंबी अवधि के लक्ष्यों (लॉन्ग टर्म गोल) को हासिल करने में मदद कर सकती है। 

योग्य प्लानिंग के साथ, असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए आपकी इनकम टैक्स स्लैब्स ग्रॉस टोटल इनकम (सकल कुल आय) से कम कर दी जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि आपको बची हुई इनकम पर इनकम टैक्स का भुगतान करना होगा। ज़्यादा जानकारी के लिए आप टैक्स प्रोफेशनल्स (जानकारों) की सेवाएं ले सकते हैं जिन्हें इस क्षेत्र का गहरा अनुभव है और कार्यक्षम (एफिशियंट) टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल  कर सकते हैं। 

इनकम टैक्स बचत करने और आपकी कमाई को लोवर (निचले) टैक्स ब्रैकेट में लाने के कुछ सबसे प्रभावी तरीके इस प्रकार हैं:

1. लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) खरीदें 

आपके परिवार के सदस्यों के लिए फायनेंशियल सिक्युरिटी (आर्थिक सुरक्षा) उपलब्ध कराने के लिए लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) का होना ज़रुरी है। इनकम टैक्स बेनिफिट्स (लाभ) की बात करें तो आपकी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए आप जो प्रीमियम भरते हैं, वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन (धारा) 80 सी के अंतर्गत आपकी टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) से डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। इसके साथ ही आप सेक्शन 80डी के अंतर्गत अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट्स पाने के लिए आपकी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारी) ऐड-ऑन्स शामिल कर सकते हैं।

उचित प्लानिंग के साथ असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए आपकी इनकम टैक्स स्लैब्स ग्रॉस टोटल इनकम (सकल कुल आय) से घटा दी (कम हो) जाती है। 

Buy Life Insurance

1. लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) खरीदें 

आपके परिवार के सदस्यों के लिए फायनेंशियल सिक्युरिटी (आर्थिक सुरक्षा) उपलब्ध कराने के लिए लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) का होना ज़रुरी है। इनकम टैक्स बेनिफिट्स (लाभ) की बात करें तो आपकी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए आप जो प्रीमियम भरते हैं, वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन (धारा) 80 सी के अंतर्गत आपकी टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) से डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। इसके साथ ही आप सेक्शन 80डी के अंतर्गत अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट्स पाने के लिए आपकी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारी) ऐड-ऑन्स शामिल कर सकते हैं।

उचित प्लानिंग के साथ असेसमेंट ईयर / मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए आपकी इनकम टैक्स स्लैब्स ग्रॉस टोटल इनकम (सकल कुल आय) से घटा दी (कम हो) जाती है। 

 

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इसका मतलब यह है कि शेष इनकम पर ही आपको इनकम टैक्स भरना होता है। ज़्यादा जानकारी के लिए आप टैक्स प्रोफेशनल्स (जानकारों) की सेवाएं ले सकते हैं जिन्हें इस क्षेत्र का गहरा अनुभव है और कार्यक्षम (एफिशियंट) टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यदि आपकी कमाई हाईर इनकम टैक्स स्लैब्स में आती है, तो एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी आपकी टैक्स लाएबिलिटी (देयता) कम करने में आपकी मदद कर सकती है। इसके साथ ही ऑनलाइन प्रीमियम कैल्कुलेटर्स के इस्तेमाल से प्रीमियम के बारे में जानना आसान है। 

सेक्शन (धारा) 80 सी के अंतर्गत इन्वेस्टमेंट (निवेश) के विकल्पों के बारे में ज़्यादा जानकारी 
 

इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का  सेक्शन 80सी  विभिन्न इन्वेस्टमेंट्स और खर्चों पर आपको टैक्स बचाने में सहायता कर सकता है। इस सेक्शन के अंतर्गत एक फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) में 1.5 लाख रुपए की सीमा तक आप डिडक्शन (कटौती) क्लेम (का दावा) कर सकते हैं। इन सभी इन्वेस्टमेंट विकल्पों के अंतर्गत आपके बेनिफिट्स (लाभों) को अधिकतम करने के लिए यदि आप एक टैक्स कैल्कुलेटर का समझदारी से इस्तेमाल करते हैं तो आपको सहायता मिल सकती है।     

इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स (निवेश विकल्प)

रेट ऑफ रिटर्न्स (लगभग)

लिक्विडिटी / तरलता

एलिजिबिलिटी /पात्रता

इन्वेस्टमेंट लिमिट (निवेश सीमा)

इनकम टैक्स लाएबिलिटी (आयकर देयता)

बैंक में फिक्स्ड डेपोज़िट (सावधि जमा)

6-7%

5 वर्ष

भारतीय निवासी

रु. 1,000 से रु. 1.5 लाख

अर्जित इंटरेस्ट टैक्सेबल होता है

पीपीएफ

7-8%

15 वर्ष

भारतीय निवासी; ग़ैर-एचयूएफ

रु. 500 से रु. 1.5 लाख

इंटरेस्ट टैक्स फ्री (ब्याज कर मुक्त है)

एनपीएस

12-14%

रिटायरमेंट (सेवानिवृत्ति) तक

18 से 60 वर्ष के बीच के भारतीय निवासी

कोई सीमा नहीं

एम्प्लॉयर  कॉन्ट्रीब्यूशन टैक्स फ्री  (नियोक्ता योगदान कर मुक्त) है।

ईपीएफ

8%

नौकरी छोड़ने के 2 महिनों बाद

बेसिक सैलरी 15 हज़ार प्रति महिने से ज़्यादा

बेसिक सैलरी (मूल वेतन) का न्यूनतम 12% + डी.ए.

यदि पाँच वर्षों के बाद निकाला गया हो तो संपूर्ण पीएफ बैलेन्स (टैक्स फ्री)   होता है

ईएलएसएस

15-18%

3 वर्ष

भारतीय निवासी

कोई ऊपरी सीमा नहीं

रु.1.5 लाख तक डिडक्ट (कटौती) की जा सकती है


नोट: रेट ऑफ रिटर्न एज़्यूम किया गया (कल्पित/अनुमानित) है। 

हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) खरीदें 


हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अनपेक्षित आर्थिक बोझ से आपको और आपके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करता है। सेक्शन 80डी के अंतर्गत आपको, पति/पत्नी, आश्रितों को कवर करने के लिए कैश (नकद) में छोड़कर आपके द्वारा किसी भी अन्य माध्यम से किया गया भुगतान डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। यह कटौती आम करदाता के लिए अधिकतम रु. 25,000 और वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटिज़न्स) के लिए रु. 50,000 है। यह आपकी कुल इनकम को हाईर (ऊंचे) टैक्स ब्रैकेट में आने से रोक सकता है।

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हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) खरीदें 

हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अनपेक्षित आर्थिक बोझ से आपको और आपके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करता है। सेक्शन 80डी के अंतर्गत आपको, पति/पत्नी, आश्रितों को कवर करने के लिए कैश (नकद) में छोड़कर आपके द्वारा किसी भी अन्य माध्यम से किया गया भुगतान डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। यह कटौती आम करदाता के लिए अधिकतम रु. 25,000 और वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटिज़न्स) के लिए रु. 50,000 है। यह आपकी कुल इनकम को हाईर (ऊंचे) टैक्स ब्रैकेट में आने से रोक सकता है।

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इसके अलावा, यदि आप अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्यारेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो आप रु. 25,000 का डिडिक्शन (कटौती) क्लेम कर सकते हैं। यदि आपके माता पिता 60 वर्ष की उम्र से ज़्यादा के हैं तो आप रु. 50,000 के डिडक्शन (कटौती) का दावा कर सकते हैं।

आपके इनकम टैक्स स्लैब्स के अनुसार कैल्कुलेट की गई फायनल टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) में डिडक्शन (कटौती) क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा एक ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर आप आपकी टैक्स लाएबिलिटी (कर देयता) के बारे में ज़्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

3. किराए की रसीद प्रस्तुत करें

किराए की रसीद प्रस्तुत करें यदि आप किराए के मक़ान में रहते हैं और आपके एम्प्लॉयर (नियोक्ता) की ओर से एचआरए मिलता है तो आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन (धारा) 10(13ए) के अंतर्गत डिडक्शन (कटौती) का लाभ ले सकते हैं।एक टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल करते हुए आपको पता करना होगा कि इस सेक्शन के अंतर्गत आप अधिकतम कितना किराया बचा सकते हैं। आपकी टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) में से एक्ज़ेम्प्श्न (छूट) निम्नलिखित फैक्टर्स (कारकों) पर आधारित होगी:

1. आपके एम्प्लॉयर (नियोक्ता) से प्राप्त एचआरए

2. भुगतान किया गया घर का किराया

3. आपकी सैलरी (यानि बेसिक +डीए) का 50% यदि आप महानगर में रहते हैं; सैलरी (यानि बेसिक +डीए) का 40% यदि आप एक नॉन-मेट्रो शहर में रहते हैं 

4. चैरिटेबल डोनेशन दें / परोपकार के लिए दान दें 
 

आप जो डोनेशन (दान) रिलीफ फंड (राहत कोष) और चैरिटेबल सोसायटीज़ को देते हैं वह इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80जी के अनुसार डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। आपकी पसंद के अनुसार आप एक भरोसेमंद टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर पता लगा सकते हैं आपकी इनकम को लोवर (निचले) टैक्स ब्रैकेट में लाने के लिए आपको कितना पैसा दान में देने की आवश्यकता होगी।

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4. चैरिटेबल डोनेशन दें / परोपकार के लिए दान दें 

आप जो डोनेशन (दान) रिलीफ फंड (राहत कोष) और चैरिटेबल सोसायटीज़ को देते हैं वह इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80जी के अनुसार डिडक्शन (कटौती) के लिए एलिजिबल (पात्र) होता है। आपकी पसंद के अनुसार आप एक भरोसेमंद टैक्स कैल्कुलेटर का इस्तेमाल कर पता लगा सकते हैं आपकी इनकम को लोवर (निचले) टैक्स ब्रैकेट में लाने के लिए आपको कितना पैसा दान में देने की आवश्यकता होगी।

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5. आपके बच्चे के लिए हाईर एजुकेशन लोन का विचार करें


यदि आप आपके बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं तो आपके टैक्स ब्रैकेट के अनुसार सेक्शन 80ई के अंतर्गत आपकी टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) में डिडक्शन (कटौती) के लिए आप क्लेम कर सकते हैं। आप यह बेनिफिट (लाभ) अधिकतम 8 वर्षों के लिए या जब तक आप लोन पर इंटरेस्ट (ब्याज) का भुगतान कर रहे हैं तब तक, जो भी पहले हो, ले सकते हैं।    

ऑनलाइन टैक्स केल्कुलेटर का इस्तेमाल कर आप पता लगा सकते हैं कि इस तरीके से आप कितनी अधिकतम राशि की बचत कर सकते हैं।  

6. होम लोन के ज़रिए एक नए घर को फायनांस करें


यदि आपने एक नया घर खरीदा है और इसके भुगतान के लिए एक होम लोन लिया है तो आप फायनेंशियल ईयर (आर्थिक वर्ष) के दौरान लोन इंटरेस्ट (ब्याज) पर रु. 2 लाख का डिडक्शन (कटौती) क्लेम कर सकते हैं। इस इनकम टैक्स लाभ को प्राप्त करने के लिए आपको आपके द्वारा खरीदे गए घर में रहना होगा। इसके साथ ही आपकी टैक्स सेविंग क्षमता के बारे में ज़्यादा जानने के लिए आप एक टैक्स कैल्कुलेटर का लाभ ले सकते हैं। 

भारत में इनकम टैक्स स्लैब्स के बारे में बार बार पूछे जानेवाले सवाल 

1. किसे इनकम टैक्स भरना चाहिए?

प्रत्येक भारतीय नागरिक को, उनकी कुल वार्षिक इनकम जिस इनकम टैक्स स्लैब्स में आती है उसके अनुसार टैक्स भरना चाहिए। इनकम टैक्स भरना यह हमारी ज़िम्मेदारी है, जो सरकार के लिए आय के महत्वपूर्ण / अत्यावश्यक स्त्रोत की तरह कार्य करता है ताकि आगे का विकास जारी रहे। आपको आपके इनकम टैक्स ब्रैकेट के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

इसके साथ ही, हिंदु अविभाजित परिवार (एचयूएफ), असोसिएशन ऑफ पर्सन्स (एओपी), फर्म्स, एलएलपी, कंपनियाँ और स्थानीय प्राधिकारी उनकी कुल इनकम जिस टैक्स ब्रेकेट में आती है उसके अनुसार इनकम टैक्स  का भुगतान करने के प्रति उत्तरदायी है।


2. सरकार किस तरह इनकम टैक्स एकत्रित करती है?


1. टैक्सपेयर्स (कर दाता) द्वारा उनके टैक्स ब्रैकेट्स के अनुसार निर्दिष्ट बैंकों में किया गया स्वैच्छिक भुगतान

2. एक व्यक्ति के इनकम स्त्रोत पर की गई टैक्स कटौती यानि टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस)  

3. टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) यानि स्त्रोत पर एकत्रित किया गया कर 
 

3. टैक्स डिडक्शन (कटौती) क्या है?


टैक्स डिडक्शन (कटौती) का मतलब उस क्लेम (दावे) से है जो आपके द्वारा टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) को कम करने और टैक्स की बचत करने के लिए किया जाता है। एक विशिष्ट फायनेंशियर ईयर (आर्थिक वर्ष) में विभिन्न इन्वेस्टमेंट (निवेश) और खर्चों के आधार पर आप डिडक्शन्स (कटौतियों) का लाभ उठाते हैं और आपकी इनकम (आय) को निचले टैक्स ब्रैकेट में लाने की कोशिश करते हैं।

कुल टैक्स डिडक्शन (कटौती) जो आप क्लेम कर सकते हैं वह इनकम टैक्स एक्ट के विभिन्न सेक्शन्स (धाराओं) और आपकी इनकम टैक्स स्लैब पर निर्भर करता है। 
 

4. इनकम टैक्स कानून के अनुसार, इनकम (आय) कैसे गठित होती है?

भारत में कई लोग सोचते हैं कि इनकम का मतलब उनके द्वारा कमाए गए पैसे से है। हाँलाकि, इनकम टैक्स कानून के अनुसार ‘इनकम / आय’ का मतलब काफी व्यापक है।

1. सैलरी पाने वाले व्यक्तियों के लिए– आपके एम्प्लॉयर (नियोक्ता) की ओर से कैश (नकद) या भुगतान के किसी अन्य स्वरुप में प्राप्त पैसे को आपकी इनकम माना जाता है।

2. बिज़नेसमैन/व्यापारी के लिए– आपकी कुल इनकम आपके नेट प्रॉफिट को बनाती है। इसमें इन्वेस्टमेंट इंटरेस्ट (निवेश ब्याज), कमीशन और इसी तरह के अन्य स्त्रोतों के रुप में आपके द्वारा कमाया गया कैपिटल इन-फ्लो (पूँजी का अंतर्वाह) भी शामिल है। .

5. किस तरह टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) एक्ज़ेम्प्टेड इनकम (छूट प्राप्त आय) से अलग है?


कानून के अनुसार, एक आर्थिक वर्ष (फायनेंशियल ईयर) में आपकी कुल कमाई से डिडक्शन्स (कटौतियों) के रुप में आपको टैक्स बेनिफिट्स (लाभ) मिल सकते हैं। इसलिए एक्ज़ेम्प्टेड इनकम (छूट प्राप्त आय) वो इनकम / आय है जिस पर आपको किसी प्रकार का टैक्स नहीं भरना पड़ता। वहीं दूसरी ओर, टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) आपकी कुल कमाई का वो बाकी हिस्सा है जिसमें से एक्ज़ेम्प्टेड इनकम (छूट प्राप्त आय) को बाहर निकाल दिया गया है। आपको इनकम टैक्स स्लैब्स के अनुसार कैल्कुलेट की गई टैक्स लाएबिलिटी (देयता) के आधार पर टैक्स का भुगतान करना आवश्यक होता है। 

6. सैलरी इनकम (वेतन आय) में कौन से विभिन्न अलाउंस (भत्ते) होते हैं?


अलाउंस या भत्ते एक व्यक्ति की कुल सैलरी (आय) का भाग होते है और उसे कर्मचारियों की कुछ विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिया जाता है। उदाहरण के लिए, एचआरए या हाउस रेंट अलाउंस (घर किराया भत्ता) सैलरी का एक घटक होता है जो टैक्स लाएबिलिटी (कर देयता) कम करने में मदद करता है।  

सामान्य तौर पर अलाउंस / भत्ते तीन प्रकार के होते हैं – फुल्ली एक्ज़ेम्प्टेड (पूरी तरह छूट प्राप्त), पार्शियली एक्ज़ेम्प्टेड (आंशिक रुप से छूट प्राप्त), और टैक्सेबल (करयोग्य)
 

7. क्या कृषि को एक इनकम सोर्स (आय का स्त्रोत) माना जाता है?


यदि आप एक किसान हैं और कृषि / खेती ही आपका एकमात्र आय का स्त्रोत है, तो आपकी इनकम नॉन टैक्सेबल है यानि इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा और यह किसी भी इनकम टैक्स स्लैब में नहीं आएगी। लेकिन यदि आपकी कुल इनकम में एक ऐसा हिस्सा भी शामिल है जो ग़ैर-कृषि स्त्रोतों से आता है, तो आपका इनकम टैक्स ब्रैकेट पता करने के लिए आपकी कृषि आय (इनकम) पर भी विचार किया जाएगा।

इस पहलू से जुड़ी ज़्यादा जानकारी के लिए, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन (धारा) 2(आईए) को जाँच लें।
 

8. क्या इनकम (आय) के सभी रिकॉर्ड या सबूतों को बनाए रखना आवश्यक है?



टैक्स का भुगतान करते समय और आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) दाखिल करते समय, विभिन्न स्त्रोतों से आपकी इनकम (आय) के सभी सबूतों का रखरखाव करना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आपको कुछ उचित तर्कसंगत रिकॉर्ड्स की आवश्यकता होगी जो आपकी इनकम डिक्लेरेशन (घोषणा) और जिस टैक्स ब्रेकेट में वो है उसका समर्थन किया जा सके।

9. ग्रॉस टोटल इनकम या सकल कुल आय क्या है?



इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 14 के अनुसार, पाँच मदें (शीर्ष/हेड्स) हैं जो एक भारतीय टैक्सपेयर (करदाता) की इनकम (आय) को परिभाषित करती है –

1. सैलरी (वेतन)

2. हाउस प्रॉपर्टी से इनकम (घर संपत्ति से आय)

3. बिज़नेस से प्रॉफिट और गेन्स (व्यापार से लाभ और अभिलाभ)

4. कैपिटल गेन्स (पूँजीगत अभिलाभ)

5. अन्य स्त्रोतों से इनकम (आय)

इन सभी मदों से प्राप्त इनकम (आय) का कुल जोड़ सकल कुल आय या ग्रॉस टोटल इनकम कहलाता है।  
 

10. मरे व्यक्तिगत खर्चों के लिए क्या मैं टैक्स बेनिफिट (लाभ) क्लेम कर सकता हूँ?


कोई भी टैक्सपेयर (करदाता) उसके घरखर्चों के लिए डिडक्शन्स (कटौती) क्लेम (का दावा) नहीं कर सकता। वे केवल इनकम टैक्स एक्ट के विभिन्न सेक्शन्स (धाराओं) में परिभाषित किए गए टैक्स डिडक्शन्स (कटौतियों) का ही क्लेम (दावा) कर सकते हैं। उनकी वार्षिक आय (इनकम) के टैक्स ब्रैकेट के आधार पर ही टैक्स का भुगतान करने के लिए वे ज़िम्मेदार हैं।

11. यदि मेरी नेट इनकम (निवल आय) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैं डोनेट (दान) करुँ तो मेरी टैक्सेबल इनकम (करयोग्य आय) क्या होगी?


चाहे कोई भी इनकम टैक्स स्लैब हो, आप जो कुछ भी कमाते हैं उसके साथ आप क्या करते हैं उससे आपको टैक्स एक्ज़ेम्प्शन्स (छूट) नहीं प्राप्त होते या इससे आपका टैक्स ब्रैकेट नीचे नहीं जाता। गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए आपका योगदान केवल सेक्शन 80जी के अनुसार ही आपको बेनिफिट्स (लाभ) उपलब्ध कराएगा।  

12. एफवाय 2019-20 के लिए सेक्शन 87ए के अंतर्गत टैक्स बेनिफिट्स (लाभ) क्या हैं?


एक भारतीय निवासी के तौर पर आप सेक्शन 87ए के अंतर्गत टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं यदि आपकी इनकम (आय) 5 लाख रुपए तक के टैक्स ब्रेकेट में आती है। विशिष्ट रुप से इस सेक्शन के अंतर्गत डिडक्शन (कटौती) इनकम टैक्स लाएबिलिटी (आयकर देयता) के 100%  या रु. 12,500, जो भी कम हो, का लाभ मिलेगा।

13. क्या आईटीआर समय से फाइल करने पर मुझे कोई बेनिफिट (लाभ) मिलेगा?


भारत सरकार इनकम टैक्स का इस्तेमाल राष्ट्र के विकास के लिए करती है। इसलिए, इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार समय पर टैक्स का भुगतान देश के समग्र विकास में आपका योगदान है। आपके इनकम टैक्स ब्रैकेट के अनुसार आपके द्वारा फाइल किया गया आईटीआर आपकी ऋण-पात्रता में मदद करता है, जो आपको आपके जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बैंक लोन प्राप्त करने के लिए पात्र (एलिजिबल) बनाता है। 

14. क्या आईटीआर फाइल (दाखिल) करने के लिए टैक्स प्रोफेशनल (पेशवर) की सेवाएं लेना अनिवार्य है?


आईटीआर फाइल करने के लिए किसी टैक्स प्रोफेशनल (पेशेवर) की सेवाएं लेने की आवश्यकता नहीं है बशर्ते आपके पास इनकम टैक्स एक्ट, टैक्स ब्रैकेट और अन्य संबंधित कानूनों के बारे में पर्याप्त ज्ञान है। आपके समय और कोशिश की बचत के लिए आप आईटीआर ऑनलाइन भी फाइल (दाखिल) कर सकते हैं। विभिन्न बेनिफिट्स (लाभों) के बारे में जानने के लिए आप ऑनलाइन टैक्स कैल्कुलेटर्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

15. यदि मैंने ज़्यादा टैक्स का भुगतान किया है तो क्या होगा?


सही टैक्स कैल्कुलेट न किए जाने पर जितना आवश्यक था, आपके द्वारा उससे ज़्यादा टैक्स का भुगतान किया जा सकता है। यदि आप आपकी इनकम (आय) के टैक्स ब्रैकेट से ज़्यादा टैक्स का भुगतान करते हैं तो आपको ब्याज सहित अधिक राशि वापस लौटा दी जाएगी। 

16. मुझे कितने समय तक आईटीआर की कॉपी रखने की आवश्यकता होगी?

आईटीए से संबंधित कानूनी कार्यवाही आईटीआर फाइल करने के बाद करीब 8 साल के आसपास सामने आ सकती है, जो हर मामले में अलग अलग हो सकती है। इसलिए, कम से कम इस अवधि के लिए आपको आईटीआर रिकॉर्ड्स रखने चाहिए। कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई 8 वर्षों के बाद भी सामने आ सकती है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि यदि आप रख सकें तो इन दस्तावेज़ों को रखा जाना चाहिए।

ई-फाइलिंग सुविधा की शुरुआत के साथ, आईटीआर रिकॉर्ड्स का रखरखाव काफी सरल और आसान हो गया है।

17. एक आईटीआर फाइल (दाखिल) करने की प्रक्रिया क्या है?
 

आप इनकम टैक्स का ऑनलाइन भुगतान करने के लिए www.tin-nsdl.com  पर जा सकते हैं। आपको सत्यापन दस्तावेज़ों के साथ प्रक्रिया पूरी करने के लिए  फॉर्म-16- पार्ट ए और बी की आवश्यकता होगी।   

ARN:- Aug/Bg/H/25

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